• READERS' OAK WEEKLY

अनकहे एहसास

Updated: May 10

कहानी (भाग 1)

मैं बयां नहीं कर सकता अपनी उस दिन की बेबसी को, जब मैं अपने ही शरीर में क़ैद था। मुझे तेज़ी से हॉस्पिटल के कॉरीडोर में एक व्हीलचेयर पर स्ट्रैप करके आइसीयू की तरफ ले जाया जा रहा था, मेरी गर्दन एक ओर झुकी हुई थी और मेरे आंसू रुक नही रहे थे। आखिर मैने अपनी पत्नी सपना और अपनी आठ साल की बेटी एलिया के खून से लथपथ मृत शरीरों को अपनी आंखो से जो देखा था। ये देखने के पहले मैं अंधा क्यों नहीं हो गया था या मैं भी क्यूं नहीं मर गया। मन कर रहा था कि मैं चीख चीख कर रोऊं, भाग कर अपनी एलिया के पास पहुंच जाऊं , पर मैं तो हिल भी नहीं पा रहा था। सब कुछ तो ख़त्म हो चुका था मुझमें फिर क्या और क्यों मुझमें जीवित था। अभी थोड़ी देर पहले तक तो सब कुछ रोज़ जैसा था ।


हर दिन की तरह मै उस दिन भी शाम को सात बजे ऑफ़िस से घर लौटा था और ज़्यादातर दिनों की तरह ही किसी बात पर मेरी और सपना की बहस हुई थी। अब मुझे एहसास होता है कि जो बातें मुझे मामूली लगती थीं वो शायद सपना के लिए बहुत मायने रखती थीं। जो मैं तब कभी समझ नहीं पाया। ख़ैर, माहौल को हल्का करने के लिए उस दिन मैं सपना और एलिया को आइसक्रीम खिलाने ले गया, जो शायद मेरी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी भूल थी क्योंकि उसी वजह से मुझे मेरी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा दर्द मिला था।

हम लोग आइसक्रीम खा कर घर लौट रहे थे, एलिया, खिलखिला कर हंसते हंसते अपने स्कूल की सारी बातें बता रही थी। उसकी हंसी के बीच की बाते तो मुझे खास समझमे नहीं आ रही थीं, पर उसकी आवाज़ की मासूमियत और चहरे के भोलेपन में मैं अपनी सारे दिन की थकान, अपनी मां और सपना की मुझसे शिकायतें, सब भूल गया। गाड़ी में रेडियो पर मेरा फेवरेट गाना ' आने वाला पल जाने वाला है ' बज रहा था। कितना सुकून का पल था वो! सपना भी शांत बैठी गाड़ी की खिड़की से बाहर शहर की खूबसूरती या शायद खामोशी देख रही थी।

अचानक, पता नहीं कहां से सामने से एक गाड़ी मेरी गाड़ी की तरफ़ तेज़ी से आ गई, मैंने अनान फानन में पूरी ताकत से स्टेरिंग को घुमाया और कस कर ब्रेक दबाया पर तब तक देर हो चुकी थी, हम उस गाड़ी से ज़ोर से टकरा गए। अगले पल क्या हुआ मुझे याद नहीं, जब होश आया तो तीन चार लोगों को मैंने ऊपर से अपनी ओर ताकते हुए देखा। वो मिलकर मुझे स्ट्रेचर पर रख रहे थे।

मैंने उठने की कोशिश की पर मैं हिल भी नहीं पाया, मुझे कहीं कोई एहसास भी नहीं हो रहा था। एम्बुलेंस के साईरेन की कर्कश आवाज मेरे कानों को चीर रही थी। मुझे तभी ही सपना और एलिया